बुधवार, 8 जून 2011

अंधेरे मे.....


एक खबर सुनते ही अचानक उन लोगो कि छोटी सी दुनिया मे खुशी कि लहर दौड़ गई...और ऐसा हो भी क्यों ना...वजह जो खास थी....पन्द्र्ह साल बाद किसी के घर खुशीयां आई...एक छोटे से बच्चे के रूप में...पर यह खुशी कि खबर एक खटास साथ लेकर आई और मेरे लिए एक सवाल छोड़ गई....हुआ कुछ यूं के कुछ माह पूर्व एक गर्भवती महिला मालती(बदला हुआ नाम) मेरे पास आई...एच.आई.वी एड्स कि जांच करवाने..... मेरे काम का एक ज़रूरी पहलू यह होता है कि मुझे जांच करने से पहले क्लाइंट को एच.आई.वी. एड्स कि पूरी जानकारी देनी पड़ती  है...फिर उसकी रज़ामन्दी के बाद जांच करनी पड़ती है...उस महिला कि जांच कि गई....और परिणाम पॉज़िटिव आया..मैने तुरंत आगे कि कार्यवाही शुरू कर दी...क्युंकि महिला गर्भवती थी तो उसके साथ साथ उसके होने वाले बच्चे को भी खतरा था...तो मैने उसे आगे के ईलाज के लिए दुर्ग(दुर्ग जिला चिकित्सालय मे एच.आई.वी पॉज़िटिव लोगो का उपचार किया जाता है)रवाना कर दिया...और उसके पति संतोष को जांच के लिए बुलवाया......पता चला कि वह रोजी मजदूरी के लिए शहर से बाहर गया हुआ है...मुझे मन ही मन संतोष पर बेहद गुस्सा आया....मै खुद से ही बाते करने लगी के संतोष जैसे और भी कई लोग इसी तरह कई महिनों तक घर से बाहर रहते हैं और अपने साथी के साथ बेवफाई करते है और वापस घर जाकर तोहफे के रुप मे ये बिमारी अपनी पत्नि को देते है....मेरी चिंता और बढ़ गई...मुझे जल्द से जल्द उसकी जांच करनी थी,क्युंकि जाहिर सी बात है.....मालती को यह रोग उसके पति संतोष से ही मिला है....मैने उसके गांव कि नर्स से कहा कि जैसे ही वह आ जाए उसे मेरे पास भेज दे...इस बात को कुछ माह हो चले है....और अचानक तीन दिन पहले वह मेरे पास आया...चेहरे पर मुस्कुराहट लिए हुए उसने मुझे खबर दी कि उसके यहां बेटा हुआ है...मैने उसे समझाया और तुरंत जांच करवाने के लिए राजी किया...पर ये क्या ? उसकी रिपोर्ट तो निगेटिव थी,मै चौंक गई...मै कुछ वक्त तक शांत रही और धीरे धीरे सारी परते मेरे सामने खुलने लगी.....कि पन्द्रह साल बाद इनके घर औलाद हुई,..मालती पॉज़िटीव है पर संतोष निगेटीव...इसका मतलब औलाद संतोष की नही है......इसका मतलब मालती कि गर्भ मे किसी और का बच्चा था और ये रोग भी वह कहीं और से लेकर आई....क्योंकि अगर ये बच्चा संतोष का होता तो.....वो भी पोज़ीटिव होता....पन्द्रह् साल से मालती की कोई औलाद नही थी......और अब वह मां भी बनी तो उसके बच्चे का कोई भविष्य नही....क्या संतोष कभी पिता नही बन सकता था या फिर मालती ने अपने पति से बेवफाई कि थी...या फिर यह कोइ मौन समझौता रहा हो दोनो के बीच का.......खैर बात चाहे जो भी रही हो.....मेरे इतना सब जानते हुए भी मै यह सब सच संतोष को नही बता सकती.....क्युंकि मेरी एक बात से सालो बाद उसकी ज़िन्दगी मे आई खुशी पल मे खत्म हो जाएगी.......क्या मुझे इस बात को सोच के ही शांत हो जाना चाहिए कि मालती कि एक बेवफाई उस घर मे ढ़ेर सारी खुशियां लेकर आई है.......और संतोष..... उस नादान को मैने ये बताया के उसे कोई तकलीफ नही है और वो कुछ महिने बाद आकर एक बार फिर से अपनी जांच करवा ले......तो उसने हां मे सिर हिला दिया......और उसी मुस्कुराहट के साथ वहां से चला गया.....मैने सोचा के अगर ये आदमी थोड़ा सा भी पढ़ा लिखा होता तो मेरे एड्स फैलने के चार कारण बताते ही वह सारा सच खुद ब खुद समझ जाता.......कई बार जानकारी का अभाव और अनपढ़ होना भी किसी के लिये कितना फायदेमन्द होता है .............

3 टिप्‍पणियां:

  1. kuchh ulajhi si bat hai. santosh sahi hai to uska bachcha posetive kaise hoga? yadi kisi aur ka hai to use ab aids ho jaega. sath hi santosh ko bhi ho jaega kyonki uski patni ko hai. maa ka bachche me kitna hoga mujhe pata nahi . par aap in sabko iski bhayavahta se vakif karae jis khuusi ko aap bachana chahti hai vah chhanik hai.us aurat ko tatkal gahan chikitsa aur aapki counsling kee jarurat hai. achchha mudda hai.

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  2. yahi to mai batana chahati hu kishor ji ke wo bachcha santosh ka nahi hai....aur agar pregnent lady positive rahe to uske hone wale bachche ko hone ki sambhavana rahati hai....aur mai is masale ko kafi sawadhani se handle kar rahi hu filhal unka proper folloup chal raha hai..

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  3. kafi din ho gaye naya kuchh padhne ke liye utsuk hai man

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